नगर परिषद को नहीं सूचना आयोग की परवाह

Dainik Jagran,9th June 2010
फाजिल्का-नगर परिषद अधिकारियों को सूचना का अधिकार कानून की परवाह नहीं है। शायद इसीलिए परिषद के सूचना अधिकारी लोगों को मांगी गई सूचना नहीं देते। इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग से करने और आयोग द्वारा तलब किए जाने पर परिषद के सूचना अधिकारी आयोग के समक्ष पेश होने नहीं जाते। परिषद के इस रवैये से परेशान शिकायतकर्ताओं व सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं ने राज्य सूचना आयोग से परिषद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
मांगी गई सूचना न देने, अधूरी व सही सूचना न देने से परेशान हो राज्य सूचना आयोग की शरण में गए कुछ शिकायतकर्ताओं ने 'दैनिक जागरण' से बातचीत में बताया कि परिषद अधिकारी अधिकांश केसों में आयोग के समक्ष पेश ही नहीं होते।
एक शिकायतकर्ता अमरनाथ चेतीवाल द्वारा मांगी सूचना का जवाब परिषद ने निर्धारित समय में नहीं दिया। उन्होंने इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग से की। इसका केस कंम्पलेन नंबर 1611 है। केस देख रहे सूचना आयोग के कमिश्नर दरबारा सिंह ने परिषद के सूचना अधिकारी को दो तारीखों पर बुलाया लेकिन वह हाजिर नहीं हुए, वहीं 16 जून को अपनी जान बचाने के लिए फैक्स के जरिये एक सूचना भेजकर आयोग को बताया कि परिषद ने सूचना मांगने वाले से मिलकर मांगी गई सूचना दे दी है और प्रार्थी संतुष्ट है, इसलिए केस को खारिज किया जाए। उधर, 24 जून को प्रार्थी अमरनाथ चेतीवाल ने तीसरी पेशी पर आयोग को बताया कि परिषद का कोई अधिकारी उनसे नहीं मिला और न ही कोई सूचना दी। इस पर सूचना कमिश्नर सिंह ने फैसले में कहा है कि परिषद के सूचना अधिकारी ने आयोग को गुमराह किया है। आयोग ने परिषद के सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, इसका जवाब न देने पर सूचना अधिकारी को 25 हजार रुपये तक जुर्माना आयोग को देने और पांच हजार रुपये शिकायतकर्ता को हर्जाना अदा करने की बात आरटीआई एक्ट की धारा 20 (1) व 19(8) के तहत कही गई है। इसके अलावा चेतीवाल द्वारा मांगी एक अन्य सूचना न दिए जाने की शिकायत केस कंपलेट नंबर 856 सूचना कमिश्नर जसपाल कौर से की तो उन्होंने परिषद के सूचना अधिकारी को पहले पांच अप्रैल, फिर 21 अप्रैल को तलब किया, लेकिन वह आयोग के समक्ष हाजिर नहीं हुए। आखिरकार 12 मई को कमिश्नर कौर ने सख्ती से आदेश जारी कर मांगी गई सूचना न देने की सूरत में जुर्माने की चेतावनी दी है।
इसी तरह एक अन्य केस कंपलेट नंबर 3884 में सूचना अधिकार कानून कार्यकर्ता दीपक मुदगिल को सूचना दिए जाने की झूठी जानकारी फैक्स के जरिये देने व दो बार चार फरवरी 2010 व 22 जून को बुलाए जाने के बावजूद गैर हाजिर रहने पर आयोग ने बंद केस को रि-ओपन कर 28 जून को नगर परिषद के सूचना अधिकारी को तलब किया है।
उधर, नगर परिषद के सूचना अधिकारी खरैती लाल नामक व्यक्ति द्वारा लगाई एक अपील नंबर 622 में भी कमिश्नर दरबारा सिंह की अदालत में दो बार बुलाए जाने पर पेश नहीं हुए थे, तो उन्होंने जिले के डिप्टी कमिश्नर को आगामी सुनवाई पर परिषद के सूचना अधिकारी की अदालत में पेशी यकीनी बनाने के आदेश दिए थे। हैरानी की बात यह है कि 27 जनवरी 2010 को हुई सुनवाई में भी परिषद के सूचना अधिकारी अदालत में पेश नहीं हुए। अब सवाल यह है कि परिषद की कानून के प्रति लापरवाही कितने और लोगों को राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाने को मजबूर करती रहेगी।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_6556940_1.html
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